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Yadi Me Shiksha Mantri Hota Par Blog 


Yadi Me Shiksha Mantri Hota
नमस्कार दोस्तों ,आज हमारी पोस्ट है Yadi Me Shiksha Mantri Hota Par Blog तो में क्या -क्या काम करता। आज हम इस पर चर्चा करेंगे। “शिक्षा” अत्यंत छोटा शब्द है।

किंतु दिखने में यह जितना छोटा लगता है। यह वास्तव में प्रकाश का स्तंभ है। वास्तव में ,ही मानव को अपनी अच्छाई या बुराई को समझने योग्य बनाती है।

शिक्षित होकर ही व्यक्ति सही मार्ग पर चल कर विकास को प्राप्त करता है। अज्ञान को नष्ट करके ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। अत: शिक्षा मानव जीवन का मूल आधार है।

उसके अभाव में मानव, मानव कहलाने योग्य नहीं बन सकता। अत: यह आधार शिला जितनी मजबूत होगी, उतना ही मानव जाती विकास होगा।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली

आज की Shiksha प्रणाली का यदि गहराई से अध्ययन किया जाए तो हमारे सामने उसकी अनेक कमियां आएंगी,आज की प्रणाली दोषपूर्ण है।

भारत की आधुनिक शिक्षा – प्रणाली पाश्चात्य प्रणाली से प्रभावित हैं। भारत में आधुनिक शिक्षा – प्रणाली का आरंभ लार्ड मैकाले ने किया था उसका प्रमुख लक्ष्य भारतीयों को अधिक से अधिक क्लर्क बनाना था।

ना कि भारतवासियों का सर्वागीण विकास करना।आज भारत के स्वतंत्र होने के 71 वर्षों के बाद भी वही प्रणाली चली आ रही है। इस प्रणाली के द्वारा ना तो मानसिक विकास होता है। और ना ही नैतिक।

यह हमारी धार्मिक परंपराओं के भी अनुकूल प्रतीत नहीं होती। यह मात्र किताबी कीड़ा उत्पन्न करती है student वर्ष भर तोते की भांति किताबे रटते रहते हैं और exam में 3 घंटे में उस बैठे हुए विषय को उगल देते हैं।

वे परीक्षा में पास होकर डिग्री प्राप्त करके रोजगार कार्यालय में नाम दर्ज करवा कर रोजगार प्राप्त करने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। आजकल कोई भी मेहनत करके राजी नहीं है सभी शॉर्टकट तरीका अपनाना चाहते हैं।

दूसरों का क्या कहना में खुद शॉर्टकट तरीका अपना रहा हू । मैंने भी रोजगार कार्य लय में अपना नाम दर्ज करवाया हुआ है। पर आजकल बहुत से लोग बेरोजगार है। सभी सरकारी नोकरी के पीछे भाग रहे है।

वो अपने खुद के अंदर दबे हुए Tailent को जगाना नही चाहते है। मेरी तरह वो भी आलसी है और आसान रास्ते पर चलकर कुछ हासिल करना चाहते है पर दोस्तों आसान रास्ता अपनाने से कुछ ही समय फायदा होगा।

दुनिया मे बहुत से ऐसे लोग है। जो कड़ी मेहनत करके ओर हर कठिन रास्ता पार करके अपनी मंज़िल तक पहुंच ही जाते है उन लोगों के बारे में बताने की जरूरत नहीँ।

आप खुद इंटरनेट से सर्च करके पता कर सकते है। वो लोग भी आप जैसे है।बस उन्होंने कड़ी मेहनत और स्वर करके अपनी मंजिल तक पहुंच पाये। अगर वो कर सकते है। तो आप क्यो नही कर सकते है।

आज के जमाने मे तो लगभग सभी सुख सुविधाये उपलब्ध हैं। आप अपना Tailent दिखाने की कोशिश तो करें, आप एक बार हारेंगे, दूसरी बार हारेंगे पर हम तीसरी बार कोशिश नही करते है।

अगर हम तीसरी बार कोशिश करें तो क्या पता हमारे हाथ सफलता की डोर आ जाएं। इसलिये बार – बार कोशिश करते रहिए।


शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन

यदि मैं होता तो ऐसा खिलवाड़ ना करता। यदि कहां मैं और कहां शिक्षा Mantri का पद। यह तो वही बात हुई कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली फिर भाग्य पर भरोसा तो करना ही चाहिए।

इसलिए भाग्य के भरोसे रहते हुए मैं अभी से यह विचार करने लगा हूं कि यदि मैं बन जाऊं तो क्या-क्या काम करूंगा ?


सर्व प्रथम इस प्रणाली में परिवर्तन करूंगा। मैं इस प्रणाली में ऐसे परिवर्तन करने का प्रयास करूंगा। कि शिक्षा सैद्धान्तिक कम और व्यवहारिक अधुक हो।

इसलिए मैं इस को व्यवसाय से जोड़ने का आदेश देता। ताकि विद्यार्थियों को ज्ञान प्राप्त करने पर भी सरकारी नौकरियों के लिए रिश्वत के रूप में अपना शोषण न करवाना पड़े।

मैं प्राथमिक सबके लिए अनिवार्य करने के साथ-साथ प्रत्येक विद्यार्थी के लिए व्यावसायिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास करता। तकनीकी सुविधाओं को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाता।

ऐसी संस्थाओं की संख्या भी पढ़ाता ताकि अधिक छात्र-छात्राएं तकनीकी ज्ञान प्राप्त करके अपना जीवन सरलता से व्यतीत कर सकें।


मेरा दूसरा प्रमुख कार्य होता है। योग्य अध्यापकों को नौकरी प्रदान करना। परिश्रमी, योग्य और कर्तव्यनिष्ठ टीचर्स अच्छी पढ़ाई प्रदान कर सकते हैं।


शिक्षकों के वेतनो में वृद्धि का प्रावधान भी करता ताकि वे समाज में सम्मानपूर्ण जीवन व्यतीत कर सके। और उन्हें ट्यूशन आदि के पीछे भागना न पड़े।

जो अध्यापक अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते। उनके विरुद्ध तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की योजना भी बनाता।


समान पाठ्यक्रम  पर बल

मेरा तीसरा प्रमुख कार्य होगा – समान पाठ्यक्रम लागू करना। मैं सारे देश में समान पाठ्यक्रम की योजना लागू करता ताकि सारे देश में पढ़ाई का स्तर एक समान बन सके।

त्रिभाषा सूत्रों को भी अनिवार्य रूप से लागू करता ताकि लोग मातृभाषा के साथ राष्ट्रभाषा हिंदी, अंग्रेजी आदि भाषाओं का भी अध्ययन कर सकते हैं। मैं यह बात भलीभांति समझता हूं कि पढ़ाई एवं पाठ्यक्रम की समानता से देश की एकता मजबूत होगी।

मेरी यह योजना होगी कि मैं छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व के विकास के लिए पाठ्य पुस्तकों के ध्यान के साथ साथ अन्य गतिविधियों में भाग लेना अनिवार्य बनाऊं।

इन गतिविधियों की परीक्षा भी हो जिससे विद्यार्थी उनमें पूर्ण मन से भाग लेना आरंभ कर दे। पुस्तकों  का बोझ कम कर के छात्र-छात्राओं को अपनी रुचि के खेलों में भाग लेने के अवसर भी प्राप्त हो।

राजनीति मुक्त शिक्षा

आज हमारे देश में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राजनीति अपने जड़े जमा चुकी है इस रोग से यह भी नहीं बच सकी। विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय राजनीति के अखाड़े बन चुके हैं।


इन मंदिरों को राजनीति से अलग रखने का हर संभव प्रयास करूंगा जिससे विद्या के इन मंदिरों में व्यक्ति सुचारु रुप से ग्रहण कर सकें और छात्र छात्राएं अपनी रुचि के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकें।

मैं तो चाहता हूं कि वार्षिक परीक्षा के साथ-साथ आंतरिक मूल्य कान भी होना चाहिए।


परीक्षा में लघुत्तरात्मक और निबंधात्मक प्रश्नों के साथ साथ वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी पूछे जाने चाहिए। परीक्षा केवल लिखित नहीं अपितु वो मौखिक भी होनी चाहिए।


शारीरिक स्वास्थ्य वी परीक्षा का भाग होना चाहिए ताकि विद्यार्थी अपने शारीरिक स्वास्थ्य की ओर भी ध्यान देने लगें।


अंत में यह कहना चाहूंगा कि आज की शिक्षा दिनों दिन महंगी होती जा रही है। इस संबंध में मुंशी प्रेमचंद ने भी कहा था, “ खर्चीली शिक्षा कभी चरित्रवान व्यक्ति पैदा नहीं कर सकती।”

अंत: Yadi Me Shiksha Mantri Hota Par Blog मेरी यह कोशिश रहेगी कि Study को इतना सस्ता बना दूं। कि हर सामान्य व्यक्ति के बच्चे Knowledge प्राप्त कर सकें।

इससे प्रचार-प्रसार अधिक – से – अधिक लोगों तक हो सकेगा और हम शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त कर सकने में भी सफल हो सकेंगे।

Note :-

आज जितने भी शिक्षा मंत्री हुए उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है शिक्षा के लिए और आगे भी करते रहेंगे इसे सिर्फ पोस्ट के नज़रिये से ही देखे।

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Final Word:-

दोस्तों, कृपया हमारी इस पोस्ट संबंधित बातें जानना या पूछना चाहते हो, और यदि आप शिक्षा मंत्री होते तो आप क्या करते comment करके अपनी राय दे।

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