Rahim Das Biography In Hindi | रहीम दास जी का जीवन परिचय

रहीम दास जी की जीवनी Rahim Das Biography In Hindi रहीम दास जी का जीवन परिचय। Rahim Kavi के बारे में आपको Full और Short जीवन परिचय बताने वाले है। ताकि आपको कहीं पढ़ने में दिक़्क़त ना हो, आपको पूरी जानकारी मिल सके। Rahim Das Biography In Hindi

 About Rahim das in Hindi | Short Jeevan Parichy Of Rahim Das

  • पूरा नाम – अब्दुल Rahim खान-ए-खाना या रहीम
  • जन्म संवत – सवंत 1613 ( 17 दिसम्बर सन 1556)
  • जन्म स्थान – लाहौर
  • पिता –  बैरम खाँ
  • माता – सुल्ताना बेग़म
  • पत्नी – महाबानू बेगम (16 वर्ष की आयु में)
  • अकबर के दरबार में इनका महत्वपूर्ण स्थान था रहीम अकबर के नवरत्नों में से एक थे।
  • गुजरात के युद्ध में शौर्य प्रदर्शन के कारण अकबर ने इन्हें ‘खानखाना’ की उपाधि दी थी।
  • Rahim अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत और हिंदी के अच्छे ज्ञाता थे इन्हें ज्योतिष का ज्ञान भी था।
  • 70 वर्ष की उम्र में 1627 ई. में रहीम का देहांत हो गया।
  • मध्ययुगीन दरबारी संस्कृति के प्रतिनिधि Kavi थे।
  • अकबर ने इनका लालन पालन शाहजादों की तरह किया।
  • अकबर ने शाहजादों को प्रदान की जाने वाली उपादी मिर्जा खाँ से Rahim को संबोधित करना शुरू किया।
  • Rahim मिर्ज़ा खाँ को जिम्मेदारी का पहला स्वतंत्र पद 1580 में प्राप्त हुआ।
  • अकबर ने उन्हें मीर अर्ज के पद पर नियुक्त किया।
  • इसके बाद सन 1583 में उन्हें शहजादा सलीम का अतालिक (शिक्षक) बना दिया गया। Rahim को इसे नियुक्ति से बहुत ख़ुशी हासिल हुई।
  • रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वभाविक और प्रभावपूर्ण है।
  • काव्य में श्रृंगार, शांत तथा हास्य रस मिलते हैं। दोहा, सोरठा, बरवै, कवित और सवैया उनके प्रिय छंद है।
  • Rahim, एक मध्यकालीन Kavi, सेनापति, प्रशासक, आश्रय दाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी,एंव विद्वान थे।
  • भारतीय समाजिक संस्कृति के अनन्य आराधक तथा सभी सम्प्रदायो के प्रति समादर भाव के सत्य निष्ठ साधक थे।
  • उनका व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न था वे एक ही साथ कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।

Rahim Das in hindi | प्रमुख रचनाएँ

  • दोहावली रहीम
  • नगर – शोभा रहीम
  • बरवै भक्तिपरक रहीम
  • बरवै नायिका-भेद रहीम
  • श्रृंगार – सोरठा रहीम
  • सोरठा रहीम
  • मदनाष्टक रहीम
  • संस्कृत श्लोक रहीम

Rahim Das Ka Jeevan Parichay पूरी जानकारी के साथ 

Rahim Das (पूरा नाम अब्दुल रहीम खान-ए-खाना) का जन्म सन सवंत 1613 में 17 दिसम्बर 1556 इतिहास प्रसिद्ध बैरम खाँ के घरलाहौर में हुआ था। 

इनके पिता का नाम बैरम खान था। माता का नाम सुल्ताना बेगम था।

रहीम मध्यकालीन कवि, सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहूभाषाविद, कलाप्रेमी, एंव विद्वान थे।

वे भारतीय समाजिक संस्कृति के अनन्य आराधक तथा सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। उनका व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न था

एक ही साथ कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।

Rahim Das ने अपने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण, कथा गीता जैसे ग्रंथों के कथानको को उदाहरण के लिए चुना है।

और लौकिक जीवन व्यवहार पक्ष को उसके द्वारा समझाने का प्रयत्न किया है,जो भारतीय सांस्कृति की वर झलक को पेश करता है।

Rahim Das के जन्म के समय इनके पिता की उम्र 60 वर्ष हो चुकी थी बैरम खान की दूसरी पत्नी का नाम सईदा खाँ था यह बाबर की बेटी गुंलरुख बेगम की पुत्री थी।

खानखाना की उपाधि अकबर ने इनके पिता बैरम खान को दी थी वे अकबर के सरक्षक के रूप में कार्यरत थे।

मुस्लिम धर्म के अनुयाई होते हुए भी Rahim Das ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिंदी साहित्य की जो सेवा की वह अद्भुत है। 

रहीम का देहांत 71 वर्ष की आयु में सन 1627 में हुआ। रहीम को उनकी इच्छा के अनुसार दिल्ली में ही उनकी पत्नी के मक़बरे के पास ही दफना दिया गया।

यह मज़ार आज भी दिल्ली में मौजूद है। Rahim Das ने स्वयं अपने जीवन काल में इसका निर्माण करवाया था।

Rahim Das Ki Shaadi 

Rahim Das Biography In Hindi रहीम का पहला निकाह (शादी) महाबानो से हुआ। महाबानो ने दो बेटियों और तीन बेटों को जन्म दिया।

पहले बेटे का नाम इरीज, दूसरे का दाराब और तीसरे का नाम फरन था यह नाम अकबर ने रखें।

Rahim Das की बड़ी बेटी का नाम जाना बेगम जिसका निकाह जिसका विवाह दानिभाव से हुआ व छोटी बेटी का निकाह मीर अमीनुद्दीन से हुआ।

 रहीम का दूसरा निकाह सौदा जाति की एक लड़की से हुआ। जिससे एक बेटे रहमान दाद का जन्म हुआ।

रहीम Das का तीसरा निकाह एक दासी से हुआ। उससे भी एक बेटे मिर्जा अम्रुल्लाह का जन्म हुआ।

Rahim Das in hindi |रहीम दास जी की प्रमुख रचनाएँ

Rahim Das Biography In Hindi रहीम के ग्रंथों में रहीम दोहावली या सतसई, बेहद, मदनाष्टक, राग पंचाध्यायी, नगर शोभा, नायिका भेद, श्रृंगार, सोरठा, फुटकर बरवै, फुटकर छंद तथा पद, फुटकर कवितव, सवैये, संस्कृत काव्य प्रसिद्ध है।

रहीम ने तुर्की भाषा में लिखी बाबर की आत्मकथा “तुजके बाबरी” का फारसी में अनुवाद किया। “माआसिरे रहीमी” और “आईने अकबरी” में इन्होंने “खानखाना” व रहीम नाम से कविता की है। अपने स्वयं को “रहिमन” कहकर भी संबोधित किया है। उनके काव्य में नीति, भक्ति, प्रेम और श्रृंगार का सुंदर समावेश मिलता है।

Rahim Das Biography In Hindi| रहीम दास जी के पुरस्कार और सम्मान 

सन 1584 में अकबर ने रहीम को खान-ए-खाना की उपाधि से सम्मानित किया।

शाही खानदान की परंपरा अनुरूप हमको “मिर्जा खाँ” का खिताब दिया गया।

Rahim Das Biography In Hindi| रहीम दास जी की भाषा शैली 

रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो बहुत ही सरल है।

यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय, बैर प्रीति अभ्यास जस, होत होत ही होय, उनके काव्य में श्रृंगार, शांत तथा हास्य रस मिलते हैं।

दोहा, सोरठा, बरवै, कवित और सवैया उनके प्रिय छंद है।

Rahim Das Ji Ke Dohe| रहीम दास जी के दोहे 

1. कही रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
विपत्ति कसौटी जे कसे, तेई सांचे मीत।।

अर्थ:- रहीम जी कहते हैं कि सगे संबंधी रूपी संपत्ति अनेक प्रकार की रीतियों से बनती है। जो व्यक्ति मुसीबत के समय सहायता रूपी कसौटी पर खरा उतरता है वही सच्चा मित्र होता है।

2. जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को तऊ न छोड़ती छोह।।

अर्थः- रहीम जी कहते हैं कि जब मछली पकड़ने के लिए जाल जल में डाला जाता है।  तो मछलियों के प्रति मोह को छोड़ जल शीघ्र ही जाल से निकल जाता है। वह उससे बाहर बह जाता है लेकिन मछलियां जल के प्रति प्रेम को त्याग नहीं पाती अतः वे जल से अलग होते ही मर जाती है।

3. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान।
कहि रहीम परकाज हित संपति सँचहि सुजान।।

अर्थः- रहीम जी इस दोहे में कहते हैं कि वृक्ष कभी भी अपने फल स्वयं नहीं खाता और ना ही तलाब कभी अपना जल पीता है। इसी तरह सज्जन व्यक्ति भी परोपकार के लिए अपना धन इकट्ठा करते हैं। दूसरों की भलाई के लिए अपना सब कुछ दे देते हैं।

Rahim Das Ji Ke Dohe hindi Me 

4. थोथे बादर क्वार के ज्यों रहीम छहरात।
धनी पुरुष निर्धन भए, करे पाछिलि बात।।

अर्थः- रहीम जी कहते हैं की क्वार के महीने में एक आकाश में घने वाले बादल बिना पानी के खाली गड़गड़ाहट की आवाज़ करते हैं, बरसते नहीं। जैसे धनी व्यक्ति गरीब हो जाने पर अपनी पिछली बातों को याद कर घमंड भरी बातें बोलता है।

5. धरती की सी रीत है, सीत धाम ओ मेह।
जैसी परे सो सहि रहे, त्यो रहीम यह देह।।

अर्थः- रहीम जी कहते हैं कि इस शरीर की झेलने की रीति धरती के समान है। जिस तरह धरती सर्दी गर्मी वर्षा की विपरीत स्थितियों को अपने पर झेल लेती है। उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी जीवन में आने वाले सुख दु:ख को सहन करता है।

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