Jabir Hussain Biography In Hindi

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आज हम जानेगे जाबिर हुसैन [Jabir Hussain Biography In Hindi] के बारे में। श्री जाबिर हुसैन हिंदी के प्रमुख गद्यकारों में गिने जाते हैं।


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Jabir Hussain Biography In Hindi

जाबिर हुसैन का जीवन परिचय

हिंदी के अतिरिक्त उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं पर भी उनका पूर्ण अधिकार है।

उनका जन्म बिहार राज्य के नालंदा जिलेंनोन के राजगिर नामक गांव में सन 1945 में हुआ था।

उनकी आरंभिक शिक्षा गांव की पाठशाला में हुई। जाबिर हुसैन मेधावी छात्र थे।ए. एम. उन्होंने अंग्रेजी विषय में की।

तत्पश्चात यह अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। ईनकी रुचि अध्यापन-कार्य के साथ-साथ साहित्यएवं राजनीति में भी रही।

यही कारण है कि एक ओर ये लेखनी के धनी बन रहे और दूसरी ओर राजनीति में भी ख्याति प्राप्त की।

सन 1977 में मुंगेर से बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए तथा मंत्री बने थे।

जाबिर हुसैन जी की प्रमुख रचनाएं

श्री जाबिर हुसैन राजनीति के कार्य करते हुए निरंतर साहित्य रचना करते हैं।

उन्होंने हिंदी में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान दिया।

जाबिर हुसैन की प्रमुख रचनाएं हैं। जो आगे है,  डोला बीबी का मजार, अतीत का चेहरा, लौंगा, एक नदी रेत भरी।

साहित्यक विशेताएं [ Jabir Hussain Biography In Hindi ] 

जाबिर हुसैन जी ने अपने युग के समाज का गहन अध्ययन किया है।

उन्हें समाज के जीवन में जो विषमताएं दिखाई दी, उनका ही वर्णन नहीं किया,

अपितु जो कुछ अच्छा लगा उसका भावात्मकता के स्तर पर चित्रण किया है।

उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपनी राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के अनुभवों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।

उनकी रचनाओं में समाज के आम आदमी के जीवन के संघर्षों का उल्लेख भी हुआ है।

संघर्षत आम आदमी और विशिष्ट व्यक्तियों पर लिखी गई उनकी डायरियां बहुत चर्चित हुई है।

आम आदमी के संघर्षो के प्रति उनकी सहानुभूति पूर्ण भावनाएं द्रष्टव्य हैं।

हुसैन जी की रचनाओं से पता चलता है कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।

उन्होंने विविध साहित्यिक विधाओं पर सफलतापूर्वक लेखनी चलाई है। किंतु उन्होंने डायरी विद्या में अनेक नवीन प्रयोग किए है।

जो वे प्रस्तुति, शैली और शिल्प की दृष्टि से नवीन है।

जाबिर हुसैन भाषा शैली 

श्री जाबिर हुसैन का 3 भाषाओं (हिंदी,उर्दू और अंग्रेजी) पर समान अधिकार है।

उनकी हिंदी भाषा में तत्सम शब्दों के साथ साथ उर्दू भाषा के शब्दों का प्रयोग हुआ है।

इसी प्रकार अंग्रेजी भाषा के शब्दों का प्रयोग भी प्रसंगानुकूल हुआ है।

उन्होंने अपने संस्मरण में अत्यंत सरल,सहज एवं व्यवहारिक भाषा का प्रयोग किया है।

व्यक्ति-चित्र को सजीव रूप में प्रस्तुत करना इनकी भाषा की प्रमुख विशेषता है।

भाषा का प्रवाह और अभिव्यक्ति की शैली हृदयस्पर्शी है। प्रभाव में ही भाषा का उदाहरण देखिए:

“ मुझे नहीं लगता, कोई इस सोई हुई पक्षी को जगाना चाहेगा। वर्षा पूर्व, खुद सालिम अली ने कहा था

कि लोग पक्षियों को आदमी की नजर से देखना चाहते हैं यह उनकी भूल है, ठीक उसी तरह, जैसे जंगल और पहाड़ों,

झरनों और अबशारों को वो प्रकृति की नजर से नहीं, आदमी की नजर से देखने को उत्सुक रहते हैं। 

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दोस्तों आपको जाबिर हुसैन के जीवन के बारे में यह थोड़ी सी जानकारी कैसी लगी। हमें Comment Box में अपने जबाब दे। 

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