Hazari Prasad Dwivedi Biography in hindi language

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय , Hazari Prasad Dwivedi Biography In Hindi.

श्री आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के बारे में पूरी जानकारी आज की पोस्ट में हम आपको देंगे।

Hazari Prasad Dwivedi Biography in hindi language

Hazari Prasad Dwivedi Jivan Parichay 

आचार्य प्रसाद दिवेदी हिंदी के सुप्रसिद्ध निबंधकार थे निबंधों की रचना द्वारा उन्होंने निबंध साहित्य को समृद्ध किया।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरत दुबे के छपरा गांव में सन 1907 में हुआ था।

उनके पिता अनमोल द्विवेदी बहुत अध्ययनशील तथा संत स्वभाव के थे दिवेदी जी की प्रारंभिक शिक्षा

अपने जिले के विद्यालयों में हुई सन 1930 में उन्होंने शास्त्र आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की।

लेखक ने बलिदान में मैथिलीशरण गुप्त की बर्थडे पार्टी तथा जयद्रथ वध जैसी कृतियों को कंठस्थ कर लिया था

उन्होंने उपनिषद महाभारत कथा दर्शन ग्रंथों का अध्ययन किशोरावस्था में ही कर लिया था

द्विवेदी जी “रामचरितमानस” का नियमित रूप से पाठक किया करते थे।

सन 1930 में अचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की नियुक्ति शांति निकेतन में हिंदी अध्यापक के पद पर हुई।

वहां पर उनको विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर, महा महामहोपाध्याय पंडित विधु शेखर भट्टाचार्य, आचार्य

क्षितिमोहन सैन, अचार्य नंदलाल बसु जैसे विश्वविख्यात विभूतियों के संपर्क में आने का अवसर मिला।

इस वातावरण में लेखक के दृष्टिकोण को अत्यधिक व्यापक बना दिया।

अध्यापन के क्षेत्र में आचार्य द्विवेदी का बहुत योगदान रहा है।

कोलकाता में “शांति निकेतन” में अध्यापन के पश्चात लगभग 10 वर्ष तक उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर तथा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

तत्पश्चात वे पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में हिंदी के वरिष्ठ प्रोफेसर तथा “टैगो-पीठ” के आचार्य पद पर प्रतिष्ठित रहे। भारत सरकार ने इन्हें “पदम-भूषण” से अलंकृत किया।

यह भारत सरकार की अनेक समितियों के निदेशक तथा सदस्य के रूप में हिंदी भाषा तथा साहित्य की सेवा करते हुए सन 1979 में दिल्ली में स्वर्ग सिधार गए।

Pramukh Rachnaye

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विभिन्न विधाओं पर सफलतापूर्वक लेखनी चलाई है। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है-

(क) समीक्षात्मक ग्रन्थ- “सुर साहित्य”, “हिंदी साहित्य की भूमिका”, “मध्यकालीन धर्म साधना”, “सूर और उनका काव्य”, ”

नाथ-संप्रदाय”, “कबीर”, “मेघदूत”, “एक पुरानी कहानी”, “हिंदी साहित्य का आदिकाल”, “लालित्य मीमांसा” आदि।

(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास- “बाणभट्ट की आत्मकथा”, “चारु चंद्र लेख”, “पुनर्नवा”, तथा “अनामदास का पोथा” ।

(ग) निबंध संग्रह- “अशोक के फूल”, “विचार परवाह”, “विचार और वितर्क”, “कल्पलता”, “कुटज” और “भारत के कलात्मक विनोद”।

Hazari Prasad Dwivedi Sahityik Visheshtaye

हिंदी निबंध-साहित्य में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पश्चात आचार्य प्रसाद द्विवेदी जी सर्वश्रेष्ठ निबंधकार हैं।

उन्होंने हिंदी साहित्य को जहां गवेशनतक आलोचनात्मक और विचारात्मक निबंध प्रदान किए,वहां उन्होंने ललित निबंधों की रचना भी की है।

वे हिंदी के प्रथम एवं श्रेष्ठ ललित निबंधकार हैं। यद्यपि उन्होंने पहली बार ललित निबंधों की रचना की, परंतु फिर भी उनका प्रयास अधूरा न होकर पूर्ण है।

उनके निबंध साहित्य की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

(क) प्राचीन एवं नवीन का समन्वय- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध साहित्य में प्राचीन एवं नवीन विचारों का अपूर्व संबंध है।

उन्होंने अपने निबंधों में जहां एक और सनातन जीवन दर्शन और साहित्य सिद्धांतों को अपनाया है।

वहीं दूसरी ओर अपने युग के नवीन अनुभवों को लिया है प्राचीन और नवीन विचारधाराओं के सामंजस्य से जो नए – नए निष्कर्ष से निकलते हैं।

वह ही उनके साहित्य की अपूर्व जैन कही जाती है। इस नए दृष्टिकोण से आज के साहित्यकारों व समाज को एक नई राह मिल सकती है।

अथवा जिसे अपने जीवन में धारण करके मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकता है।

(ख) विषयों की विविधता-आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध का जीवन अनुभव बहुत गहन एवं विस्तृत है। 

उन्होंने अपने जीवन के विविध पक्षों को समीप से देखा और परखा है

अपने विस्तृत जीवन अनुभव के कारण ही उन्होंने अनेक विषयों को अपने निबंधों का आधार बनाया है। 

उनके निबंधों को विषय कविता के आधार पर निम्नलिखित कोठियों में रखा जा सकता है

(1).सांस्कृतिक निबंध, (2).ज्योतिष सबंधी, (3).समीक्षात्मक, (4).नैतिक, (5). वृक्ष अथवा प्रकृति संबंधी।

Hazari Prasad Dwivedi In Hindi

(ग) मानवतावादी विचारधारा- द्विवेदी जी के निबंध साहित्य में मानवतावादी विचारधारा के सवर्त्र दर्शन होते हैं।

इस विषय में द्विवेदी जी ने सर्वे लिखा है, “मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाति हूं।

जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, ही हीनता और प्रमुखापेक्षिता से न बचा सके, जो उसकी आत्मा को तेजोदीप्त न कर सके,

जो उसके हदय को परदुःखकातर, संवेदनशील न बना सके, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है।”

आचार्य द्विवेदी जी का साहित्य संबंधी यह दृष्टिकोण उनके साहित्य में भी फलित हुआ है।

इसलिए उनके साहित्य में स्थान-स्थान पर मानवतावादी विचारों के दर्शन होते हैं।

(घ) भारतीय संस्कृति में विश्वास- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सदैव भारतीय संस्कृति के पक्षधर बने रहे हैं।

इसलिए उनके निबंध साहित्य में भारतीय संस्कृति की महानता की तस्वीर देखी जा सकती है।

भारतीय संस्कृति का जितना सुक्षमतापूर्ण अध्ययन व ज्ञान उनके निबंधों में व्यक्त हुआ है, वह अन्यत्र नहीं है।

उन्हें भारत की संस्कृति के विभिन्न तत्वों में एकता या एकसूत्रता के दर्शन किए हैं।

जीवन की एकरूपता की यही दृष्टि उनके साहित्य में साकार रूप धारण करके प्रकट हुई है।

द्विवेदी जी सारे संसार के मनुष्यों में एक सामान्य मानव संस्कृति के दर्शन करते हैं

भारतीय संस्कृति के प्रति विश्वास एवं निष्ठा रखने का यह भी एक कारण है।

“अशोक के फूल” “भारतीय संस्कृति की देन” आदि।निबंधों में उनका यह विश्वास सशक्तता से व्यक्त हुआ है।

Sahityik Visheshtaye In Hindi 

(ङ) भाव तत्व की प्रधानता- आचार्य द्विवेदी के निबंध साहित्य की अन्य प्रमुख विशेषता है- भाव तत्व की प्रमुखता।

भाव तत्व की प्रधानता के कारण ही भाषा धारा-प्रवाह रूप में आगे बढ़ती है।

वह गंभीर से गंभीर विचार को भी भावात्मक शैली में लिखकर उसे अत्यंत सहज रूप में प्रस्तुत करने की कला में निपुण है।

इसी कारण उनके निबंधों में कहीं विचारों की जटिलता या क्लिष्टता अनुभव नहीं होती।

इस दृष्टि से “शिरीष के फूल” शीर्षक का निबंध की यह पंक्तियां देखिए-

” एक-एक बार मुझे मालूम होता है कि यह श्री से एक अद्भुत अवधूत है

दुख हो या सुख वह हार नहीं मानता और दो का लेना न माधो का देना जब धरती और आसमान में चलते रहते हैं

तब भी यह हजरत ने जाने कहां से अपना रस खींचते रहते हैं मौज में आठों याम मस्त रहते हैं 80 तो दिल ते हैं। “

(च) संक्षिप्तता- संक्षिप्तता निबंध का प्रमुख तत्व है।द्विवेदी जी ने अपने निबंधों के आकार की योजना में इस तत्व का विशेष ध्यान रखा है।

यही कारण है कि उनके निबंध आकार की दृष्टि से संक्षिप्त हैं।यह आकार में छोटे होते हुए भी भाव विचार तत्व की दृष्टि से पूर्ण हैं।

यह विषय विवेचन की दृष्टि से सुसंबंध एंव कसावयुक्त है।

शैली एवं शिल्प की दृष्टि से भी कहीं अधिक फैलाव नहीं है।

विषय का विवेचन अत्यंत गंभीर एवं पूर्ण है। इसलिए निबंध कला का आदर्श बने हुए हैं।

Sahityik Visheshtaye

(छः) देश-प्रेम की भावना- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध साहित्य में देश प्रेम की भावना के स्वत्र दर्शन होते हैं।

वे देश प्रेम को हर नागरिक का परम धर्म मानते हैं।

जिस मिट्टी में हम पैदा हुए हमारा शरीर जिसके अन्न, जल,वायु से पुष्ट हुआ,उनके प्रति लगाव या प्रेम-भाव रखना स्वाभाविक है।

इसलिए उन्होंने अपने निबंध साहित्य में देश प्रेम की भावना की बार बार और अनेक प्रकार से अभिव्यक्ति की है।

इस दृष्टि से उन्होंने अपने निबंधों में अपने देश की संस्कृति, प्रकृति, नदियों, पर्वतों, सागरों, जनता, के सुख-दुख का अत्यंत आतिमियतापूर्ण वर्णन किया है।

“मेरी-जन्मभूमि” निबंध इस दृष्टि के अत्यंत उत्तम निबंध हैं इस निबंध में उन्होंने लिखा भी है,

“यह बात अगर छुपाई भी तो भी कैसे छिप सकेगी कि मैं अपनी जन्मभूमि को प्यार करता हूं।

Hazari Prasad Dwivedi Bhasha shaili

आचार्य द्विवेदी जी के निबंधों में गंभीर पांडित्य और सरस हार्दिकता दोनों का साथ साथ निर्वाह हुआ है।

और पंडित एवं ललित्य का ऐसा सामंजस्य मिलना दुर्बल है। वह विषय को सरल-सहज भावो में इस प्रकार व्यक्त करते हैं कि पाठक विषय को हदयगम करता चलता है।द्विवेदी जी की तत्सम प्रधान साहित्य का भाषा है।इसमें उन्होंने छोटे एवं बड़े दोनों प्रकार के वाक्यों का प्रयोग किया है। जहां लंबे वाक्यों का प्रयोग हुआ है, वहां विचार को समझने में अवश्य थोड़ी कठिनाई अनुभव होती है।

उनकी भाषा में तत्सम शब्दावली के अतिरिक्त यथास्थान तद्भव,अंग्रेजी,उर्दू- फारसी,व देशज शब्दों का भी भरपूर प्रयोग हुआ है। भाषा सुसंगठित,परिष्कृत,विषयाकुल एंव प्रवाहमयी है।

उनकी रचनाओं में भावनात्मकता लालित्य एवं माधुर्य का समावेश स्वतर दिखलाई पड़ता है।

उन्होंने अपने निबंधों में विचारात्मक,व्यंग्यात्मक एवं भावात्मक शैलियों का सफल प्रयोग किया है।

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