Chitrakar Ki Kahani चित्रकार की कहानी सफ़लता मिली जिद्द से

Chitrakar Ki Kahani चित्रकार की कहानी – Chitrakar in Hindi एक कलाकार की कीमत सिर्फ एक कलाकार ही जान सकता है। हजारों लोगों में से वह महज कुछ ही लोग होते हैं जो असल कलाकार होते हैं, जिनकी कला ही उन्हें एक इस दुनिया में नई पहचान दिलाती है और कामयाब बनाती है।

हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ ऐसा होता है जो उसे दूसरों से अलग बनाता है। यही उसका जीवन बन जाता है। पुराने जमाने में एक कलाकार अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अपनी कला का प्रदर्शन लोगों के सामने किया करता था परंतु आज के 21वीं सदी में दुनिया बदल गई है। यदि आज आप एक सच्चे कलाकार हैं तो आप कीमत लाखों में है। कोई पैसों के दम पर आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता।

Chitrakar in Hindi जरूरत है तो सिर्फ अपने अंदर के छुपे हुए हुनर को पहचानने की और दुनिया के सामने उसका प्रदर्शन करने की। यह दुनिया बड़ी जालिम है। यह हर इंसान को आगे बढ़ने से रोकती है। वह किसी की कामयाबी नहीं देख सकती। आपको अपनी ताकत के बलबूते पर स्वयं अपना रास्ता बनाना होगा और अपनी मंजिल तय करनी होगी।Chitrakar Ki Kahani

बताना चाहता हूं आप लोगों को आज एक चित्रकार की कहानी

Chitrakar Ki Kahani उसका नाम राजवीर था। बचपन से ही उसे चित्र बनाने का बड़ा शौक था। चित्र बनाते बनाते यह कब उसका पेशा बन गया उसे भी पता ना चला। उसके चित्र में एक सच्चाई थी, एक बार यदि कोई उसके चित्र को देख ले तो कभी ना भूल सके। आज वह पेशेवर चित्रकार है और दूर-दूर से लौग राजवीर से अपनी तस्वीर बनवाते हैं और उसे मुंह मांगी कीमत देते हैं। राजीव को पैसों का मोह नहीं था।

वह बस अपनी कला का प्रदर्शन पूरी दुनिया के सामने करना चाहता था। कलाकारी ऐसी की कोई तारीफ करते ना थके। दर असल इसकी शुरुआत तब हुई थी जब वह महज 6 साल का था। कक्षा में राजवीर के अध्यापक पूरी कक्षा को शेर और चूहे की कहानी सुना रहे थे। परन्तु वह अपनी किताब में मोर का चित्र बना रहा था। कुछ समय बाद अध्यापक का ध्यान राजवीर पर गया।

नजदीक आकर देखा तो मोर का बड़ा ही सुंदर दृश्य उसने अपनी किताब में बनाया था। अध्यापक यह देखकर बहुत खुश हुऐ। उन्होंने उसकी बहुत प्रशंसा की तथा अपने हुनर पहचानने के लिए प्रोत्साहन भी दिया। राजवीर के पिताजी बहुत ही गर्म मिजाज के थे। वह उसे इंजीनियर या डॉक्टर बनाना चाहते थे। उसका चित्र बनाना उन्हें कतई पसंद नहीं था। इसलिए राजवीर छुप-छुपकर चित्र बनाया करता था।

राजवीर का मन पढ़ाई-लिखाई में बिल्कुल नहीं लगता था। उसका लगाव सिर्फ चित्रों के प्रति था। वह हरदम अपनी कला पर मेहनत करता और नए-नए चित्र बनाया करता था। जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ चित्रों के प्रति उसका लगाव और भी बढ़ता गया। पूरे स्कूल में उसके जैसा चित्र कोई और नहीं बना सकता था। जब जब स्कूल में चित्र प्रतियोगिता होती, वह हमेशा प्रथम स्थान पर आता था। सबका मानना था कि राजवीर एक दिन बहुत बड़ा चित्रकार बनेगा और अपने माता पिता का नाम जरूर रोशन करेगा।Chitrakar Ki Kahani

Chitrakar Ki Kahani

राजवीर के पिताजी का मानना था कि चित्र बनाना सब फिजूल का काम है। यह तो कोई भी कर सकता है, इसमें कोई भविष्य नहीं है। वह शायद कला की ताकत को नहीं जानते थे। कला हर किसी के पास नहीं होती। भगवान बस कुछ ही किस्मत वालों को कला से नवाजता है। उनका बेटा उनमें से एक था। परंतु यह बात वह नहीं समझते थे। जब भी राजवीर अपने घर में कोई सुंदर दृश्य बना था वह उसे फाड़ देते और पढ़ाई करने के लिए बैठा देते थे।

ना मानने पर वह उसे खूब डाटते पीटते और डॉक्टर इंजीनियर बनने के लिए प्रोत्साहन देते। स्कूल के हेड मास्टर, अध्यापक तथा अन्य विद्यार्थी ने भी उनके पिताजी को बहुत समझाया कि वह राजवीर के हुनर को पहचाने और उसके सपनों को पूरा करें। परंतु उन्होंने किसी की ना सुनी। वह अपनी जिदद् पर अड़े रहे।

राजवीर डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनना चाहता था। वह बस एक चित्रकार बनना चाहता था और अपनी जिन्दगी में खुश रहना चाहता था। यही उसकी तमन्ना थी। पिताजी की इच्छा के विरुद्ध काम करना राजीव को भी पसंद नहीं था।
परंतु चित्रकारी का जो जुनून उस पर सवार था वह पिताजी की इच्छा से ज्यादा था। लाख समझाने पर भी जब उसके पिताजी ना माने तो वह अपना मन मारकर पढ़ाई में ध्यान देने लगा, परंतु चित्र बनाना नहीं छोड़ा।

धीरे-धीरे राजीव ने पढ़ाई लिखाई चालू कर दी और पढ़ाई करते-करते उसने अपनी 12वीं कक्षा पास कर ली। अब उसके पास केवल दो रास्ते थे या तो घुट घुट कर अपने पिता जी की इच्छा पूरी करना, नहीं तो अपना पूरा जीवन चित्र के लिए समर्पित कर देना और खूश रहना।

एक दिन बाजार में सामान खरीदते वक्त उसकी नजर एक इश्तिहार पर पड़ी। इश्तिहार पर लिखा था

” चित्र बनाओ इनाम पाओ”। प्रतियोगिता कराने वाली कंपनी एक बहुत प्रसिद्ध कंपनी थी जो नए टैलेंटेड लड़के को ढूंढ रही थी। जीतने वाले को 10000 रूपये  का इनाम था। राजवीर के मन में ख्याल आया क्यों ना इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए और अपनी किस्मत आजमानी चाहिए। उसने तुरंत अपना पंजीकरण प्रतियोगिता के लिए करवा दिया और एक सुंदर सा दृश्य बनाकर कंपनी में दे आया।

कुछ दिन पश्चात राजवीर के पास एक फोन आया। फोन पर उस कंपनी के मालिक “रोहन श्रीवास्तव” बोल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मुबारक हो आपने हमारी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। आपको ₹10000 का इनाम मिला है साथ ही साथ आपको एक नौकरी का भी प्रस्ताव मिलता है। क्या आप इच्छुक हैं?

राजवीर की खुशी का ठिकाना नहीं था, उसने बिना सोचे समझे तुरंत उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। यह खुशखबरी उसने सबसे पहले अपने पिताजी को सुनाई थी। पिताजी यह जानकर बहुत खुश हुऐ। उन्हें समझ आ गया कि उनके बेटा बहुत काबिल है। यदि वह चित्रकार ना बन पया तो वह अपनी जिन्दगी से हताश हो जाऐगा।उन्होंने अपने बेटे की कला को समझा और अपनी हठ छोड़ दी और उसे अपने जीवन में चित्रकार बनने की इजाजत दे दी।

बधाई के साथ साथ राजवीर के पिताजी ने उसे अपना आशीर्वाद भी दिया। पिता जी का आशीर्वाद पाकर राजवीर बहुत खुश हुआ। अब उसे किसी की चिंता नहीं थी। वह अपनी मंजिल साफ देख सकता था। कुछ समय बाद राजवीर नौकरी करने लगा और अच्छा पैसा कमाने लगा। धीरे धीरे अपनी मेहनत के बल पर वह तरक्की हासिल करता चला गया। आज वह एक कामयाब चित्रकार है और अपने जीवन में बहुत खुश है।

सीख:- अपने हुनर को पहचानो और मेहनत करो। सफलता अवश्य मिलेगी।

Ankit 

Website :- https://ankitstories.com/

Chitrakar Ki Kahani ” यह लेख हमें भेजा है Ankit जी ने। helpbookk.कॉम में ” चित्रकार की कहानी ” Share करने के लिए अंकित जी का बहुत-बहुत धन्यवाद। हम अंकित जी को ब्लॉग्गिंग फील्ड में बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनायें देते है। और उम्मीद करते है। की उनकी अन्य रचनाएँ आगे भी इस ब्लॉग पर प्रकाशित होंगी।

मज़ेदार कहानियाँ पढ़ने के लिए आप https://ankitstories.com/ साइट पर पढ़ सकते है ये काफ़ी बेहतरीन स्टोरी लिख़ते है।

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