Bone Marrow in hindi | हड्डी से संबंधी रोग

हड्डी से संबंधी रोग ,Haddi rog in hindi, Bone Marrow in hindi.

Bone Marrow in hindi


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मोच आना | what is bone marrow in hindi

चलने, दौड़ने, सीढ़ियां उतरने – चढ़ने ढलान से फिसलने, पैर ऊंचा – नीचा पड़ने,

बच्चों को खेलते समय टखने, घुटने या ऐडी में मोच आ जाती है।

मोच आने पर मांसपेशियों पर अधिक खिंचाव पड़ता है या उस अंग पर मरोड सी आने लगती है।

मोच आने पर वह स्थान सूज जाता है और दर्द होने लगता है।

घरेलू इलाज | Bone Marrow in hindi 

मोच में निम्न उपाय काम में लाएं

1. मोच वाले स्थान पर ठंडी सेंक दे और उस पर तब तक पट्टी बंधी रहने दें, जब तक कि दर्द कम ना हो जाए।

2. मोच वाले स्थान पर सोज उतारने के लिए गर्म पानी में फिटकरी या नमक डालकर, पतली धार बनाकर गुनगुना पानी डालें।

3. हल्दी को पानी में पीसकर उसका गर्म लैप मौच वाली जगह पर कर दें।

4. हल्दी और प्याज को पीसकर मोच वाले स्थान पर लेप करें। इससे दर्द में आराम मिलेगा तथा सूजन उतर जाएगी।

5. पुराना गुड़ तथा हल्दी मिलाकर प्रभावित स्थान पर बांधे।

6. शहद और चूना मिलाकर मोच वाले स्थान पर लेप करके पट्टी बांधे।

7. तिल की खली पानी के छींटे देकर पीस लें, उसे गर्म करके गुनगुना की ही मोच पर बांधे।

8. बैंगन के गूदे में हल्दी मिलाकर गर्म करें हल्का सेक देकर मोच पर बांधे।

हड्डी की चोट (फ्रैक्चर) | Bone Marrow in hindi 

चलते फिरते फर्श पर फिसलने ,लौरी आदि के उलटने साइकिल से गिरने या टकराने से चोट आ जाती है।

गुम चोट लग जाती है बहुत ज्यादा हुआ तो मांस फट जाता है इससे सूजन तो आती ही है।

वह स्थान लाल या सुन पड़ जाता है चोट वाले स्थान पर दर्द होता है जो हल्की सी मालिश करने या दबाने पर ठीक हो जाता है। 

थोड़ी सी सिकाई मलहम आदि लगाने से आराम आ जाता है। 

बैंगन या नागफनी की सिकाई से इस प्रकार की चोटें आसानी से ठीक हो जाती है।

लेकिन जब हाथ या पैर की हड्ड़ी टूट जाती है तो बड़ी पीड़ा होती है।

ऐसे में चोट की मालिश बिलकुल नहीं करनी चाहिए और न ही हिलाना- डुलाना चाहिए

सावधानियां

फ्रैक्चर होने पर निम्न सावधानियां बरतें:

1.फैक्चर वाले अंग को हिलाएँ-डुलाएँ नहीं, न ही उल्टी-सीधी मालिश करें।

2. यदि हड्डी टूट कर खाल के बाहर आ गई है तो उसे दबाए नहीं।

3. यदि बाँह की उपरी या निचली हड्डी टूट गई हो तो बाँह को छाती के साथ बाँध दे।

4. हड्डी टूटने का पता न चल रहा हो और लगातार दर्द हो तो उसका x-ray अवश्य करें।

5. एक्स – रे में यदि फैक्चर दिखाई देता है तो डॉक्टर उसे सीधा करके प्लास्टर चढ़ा देगा,

हालांकि हड्डी अपने आप जुड़ती है, प्लास्टर उसे हिलने – डुलने तथा टेढ़ा होने से बचाने के लिए चढ़ाया जाता है।

6. जिस चोट में फैक्चर नहीं है, परंतु दर्द और सूजन है तो उस स्थान पर बैंगन के आधे भाग

पर हल्दी पाउडर लगाकर सिंकाई कर दे और रात्रि को बैंगन के गुदे में हल्दी मिलाकर गर्म करके बांधे।

7. चोट पर फिटकरी या गुनगुना पानी डालें तथा बाद में शहद व चुना मिलाकर लेप कर दे।

8. ग्वारपाठा का गुदा तथा हल्दी मिलाकर चोट पर बांधे। दर्द और सूजन में राहत मिलेगी।

गठिया रोग

दर्द तो कोई भी हो, बड़ा पीड़ादायी होता है। जोड़ों के दर्द की तकलीफ असहनीय होती है।

गठिया से होने वाली पीड़ा को तो इसका भुक्तभोगी ही जान सकता है। जब यह शुरू होता है

तो रोगी का एक डग रखना भी दूभर हो जाता है।

गठिया रोग के  कारण

यह रोग खून की कमी, शारीरिक कमजोरी तथा बुढ़ापे में हड्डियों की चिकनाई कम होने के कारण होता है।

रक्त में यूरिक एसिड नामक पदार्थ पैदा होकर गांठों में जमा हो जाता है। और फिर गांठों में दर्द का कारण बनता है। 

चलने – फिरने, उठने – बैठने में तकलीफ होती है। घुटने कड़े हो जाते हैं।

कभी-कभी सूजन भी हो जाती है।

गठिया रोग में घरेलू उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने इसके अनेक घरेलू उपचार बताएं हैं यथा –

1.10 ग्राम सोंठ का चूर्ण, 5 ग्राम कालीमिर्च, 5 ग्राम बायबिडंग तथा 5 ग्राम सेंधा नमक सबको कूट – पीसकर चूर्ण बनाकर एक शीशी में भर लें।

इस चूर्ण में से आधा चम्मच शुद्ध शहद के साथ चाटे। इससे घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा।

2. 10 ग्राम सोंठ 10 ग्राम अजवाइन को 200 ग्राम सरसों के तेल में डालकर तेल को पकाए।

सोंठ तथा अजवाइन भूनकर जब लाल हो जाए तो तेल को आँच से उतार लें।

यह तेल सुबह-शाम दोनों समय घुटनों तथा पैरों पर मल कर पट्टी बांध ले।

3. घुटने पर कच्चे आलूओ को पीसकर उसकी पुल्टिस बांधे।

4. एक चम्मच मेथी को पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इसे दोपहर के भोजन के बाद ताजा पानी

के साथ सेवन करें। इसका 40 दिन तक सेवन करने से घुटनों का दर्द जाता रहेगा।

5. सुबह की नित्य क्रिया से निपटने के बाद भूखे पेट 5 ग्राम अखरोट की गिरी,

पांच ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा एक चमच्च अरंड का तेल, तीनों चीजें एक साथ गुनगुने पानी से ले।

6. नीम की छाल को पीसकर कपड़ छान कर ले।

फिर इसे वेसलीन या मुंह में मिला लें। इसके बाद इस मलहम को घुटनों पर मले।

7. कच्चा करेला ले। इसका रस निकाल कर गरम करें, और इस से मालिश करें।

8. नागकेसर के बीजों का तेल लेकर इस से मालिश करें, लाभ होगा।

9. यदि फालसे की जड़ मिल जाए तो इसका काढ़ा तैयार करें। इसे पीने से रोग जल्दी शांत होगा।

10. गठिया के रोगी को टमाटर का सूप सेवन करते रहना चाहिए।

11. प्याज का रस 3 चम्मच निकाले। इस में 3 चम्मच राई का तेल डालें।

दोनों मिलाकर धीरे-धीरे मालिश करें। गठिया रोग में बहुत फायदेमंद है।

मोच आना

12. गठिया के रोगी यदि उड़द को अरंड की छाल के साथ ओटाये

और फिर छानकर सेवन करें, तो अच्छा लाभ मिलेगा।

13. गठिया रोग को जड़ से मिटाने के लिए असगंध के पंचांग का रस एक कप पी लें है।

इसे कुछ दिनों तक नियमित पीते रहें।

14. तुलसी के पत्तों को उबाले। भाप उठने दे। प्रभावित अंग पर या भाप पड़ने दे।

बाद में इसका पानी जब सहन करने योग्य गरम रह जाए तो इससे प्रभावित अंग की सिंकाई करें, धोएं, इस से पूरा आराम मिलेगा।

15. त्रिफला, पीपलामूल, सोंठ काली मिर्च, पीपल – सबको 10 – 10 ग्राम की मात्रा में लेकर, पीसकर चूर्ण बना लें।

इसमें से दो चुटकी चूर्ण रोज सुबह – शाम शहद के साथ सेवन करें।

16. हींग को घी में मिलाकर हाथ, पैर में मालिश करें, जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा।

यह तेल स्नायुओ को मजबूत बनाता है।

17.100 ग्राम कपूर तथा 400 ग्राम तिल का तेल एक ढक्कन दार शीशी या बर्तन में बंद कर धूप में रखें।

जब ठीक प्रकार से मिल जाए तो गठिया के दर्द वाले स्थान पर मालिश करें, आराम अवश्य मिलेगा।

18. सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर गठिया में मालिश करने से भी आराम मिलता है।

19. वात – कफ मिश्रित गठिया के दर्द में सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, लहसुन, सफेद जीरा तथा

सेंधा नमक शब्द 25 – 25 ग्राम तथा 5 ग्राम हींग का चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच

की मात्रा में लेकर अदरक के रस तथा शहद के साथ चाटना चाहिए।

20. लहसुन के रस में कपूर मिलाकर मालिश करने से भी घटिया तथा वात रोग में आराम मिलता है।

21. दोनों घुटनों पर रात को मिट्टी की पट्टी बांधे तथा वाष्प स्नान करें।

21. हर दूसरे दिन अरंडी के पत्ते पर तेल से चुपड़कर गर्म करके घुटनों पर बांधे।

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