Beti Aur Maa Moral Stories In Hindi | बेटी के लिए माँ का प्यार

बेटी के लिए माँ का प्यार, Beti Aur Maa Moral Stories In Hindi. Suvichar In Hindi माँ – बाप की आँखों में दो बार आंसू आते है। लड़की घर छोड़े तब और लड़का मुँह मोड़े तब। बेटियाँ माँ की सबसे अच्छी दोस्त अच्छी दोस्त होती है।

Maa Aur Beti moral stories in hindi

ठंड के दिन है सब रजाई में दुबके हुए है माँ रसोई में फिर भी कंपकंपाते हाथो से खाना बना रही है ,उसकी बेटी कविता ऑफिस से आने वाली है। घड़ी में 6 बजे का घंटा बजा तो माँ का हाथ और तेज़ी से चलने लगा।

सब्जी गैस पर आटे से सने हाथों से एक हाथ से बाल हटाती और रोटी बेल रही है दरवाज़े की घंटी बजी..माँ गैस को स्लो कर दौड़ी दरवाज़े की तरफ़….बेटी के लिए दरबाजा खोलने।

बेटी ने कहा माँ धीरे – धीरे आया करो… गिर जाते तो लग जाती आपको….मैं इंतजार कर सकती हूं।

मां का एक हाथ पकड़ दरवाजे से अंदर लाती है वेलन हाथ में से ले कहती है यह क्या हालत बना ली है। 

अपनी मैं आकर कर लेती सब मां के बालों पर चिपका आटा कविता अपने हाथों से हटाती है।

अच्छा मां आप बैठो मैं चाय बना के लाती हूं देखो गर्मागर्म समोसे लाई हूं। यह दो भाभी को भी देकर आती हूं। भाभी एक ही घर में अलग रहती हैं अलग खाना बनाती है मां से बात नहीं करती है फिर भी कविता बराबर उन्हें मानती है।

चाय बना दो कप में चाय लाती है और दोनों मां बेटी बैठकर समोसा खाते हुए बात करती है मां कहती है बेटी अब तुझे शादी कर लेनी चाहिए।

Beti Aur Maa Moral Stories In Hindi

मैं बूढी हो चली हूं जाने कब संसार से विदा ले लूं। तेरे पापा होते तो मैं यूं चिंता ना करती।

कब तक तू यूं ही अकेली रहेगी नौकरी कर गुजारा करती रहेगी।

कविता उठकर पीछे से मां के गले में हाथ डालती है प्यार से कहती है मां मैं तुझे बुरी लगती हूं।

क्या क्यों मुझे भगा रही हो मेरे बाद तुम्हारा ध्यान कौन रखेगा। भैया तो भाभी के साथ अलग रहते हैं। 

मैं शादी नहीं करूंगी मां तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी।

मां उसे अपने सामने खींचती है पीछे से कविता देख अमित कब तक तेरा इंतजार करेगा।

तुझसे प्यार करता है उसकी तो सोच तूने उसे 2 साल से यूं ही उलझा रखा है।

उसके भी तो अरमान होंगे कुछ अरे बुढ़ापे में करेगी क्या शादी 25 साल की होने को आई है। मेरे लिए क्यों अपनी जिंदगी से खुशियों को दूर रखे हुए हैं।

मां मैं खुश हूं कविता बोली और आपको दुखी कहां से लगती हूँ रही बात अमित की तो मैंने उसे काफी समझाया है कि तू अच्छी सी मां की पसंद की लड़की से शादी कर ले पर वह मानता नहीं है।

माँ और बेटी की कहानी 

कहता है पूरी जिंदगी इंतजार करेगा मां तुम ही बताओ मैं कैसे उसे उसके मां-बाप से छीन सकती हूं। 

कैसे तुम्हें अकेला छोड़ सकते हैं अमित के मां-बाप क्या आपको मेरे साथ रहने देंगे।

वह दकियानूसी विचारों के हैं उनको कुछ भी मान्य नहीं होगा।

एक शादी से दो परिवार बिखर जाएंगे क्या यह ठीक होगा माँ ??

अमित को मैं सारी खुशियां नहीं दे पाऊंगी वह अपने मां बाप को छोड़कर मेरे साथ और आपके साथ रहने की बात करता है। भैया के बिना आप क्या महसूस करती हो मुझे पता है मैं नहीं चाहती कि अमित भी ऐसा करें।

मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं बेटी का प्यार त्याग उनकी परवाह करना देख कर खुद को बेबस महसूस करती है।

याद आ जाता है कविता का बचपन उसके पिता कविता को वो जब भी प्यार करते थे।

मासूम सी कविता कहती थी मां मैं बड़ी होकर तेरा ख्याल रखूंगी।

तुझे छोड़कर नहीं जाऊंगी कभी और उसने वो बातें सच में सच कर दिखाई।

दुनिया कहती है कि मां महान होती है ममता की मूरत होती है।

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