लोहड़ी क्यों मनाई जाती है और यह खुशियों का पर्व क्यों माना जाता है 2019

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 लोहड़ी क्यों मनाई जाती है नमस्कार दोस्तों, आज हम भारत में मनाये जानेवाले त्यौहार में से एक लोहड़ी त्यौहार के बारे में जाननेवाले है। लोहड़ी क्यों मनाई जाती है, त्योहार हमारे भारतीय संस्कृति और सभ्यता ( Lohri Kyo Manai Jaati Hai ) के शाश्वत प्रतीक हैं भारत में समय-समय पर पर्व उत्सव को अत्यंत श्रद्धा, आस्था, उमंग, उल्लास और उत्साह के साथ विभिन्न परंपराओ और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है इनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं में प्रेरणा तो देती है साथ ही रिति – रिवाज, संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी देती है। “लोहड़ी मनाने का कारण”

ऐसा ही पारस्परिक सौहार्द और रिश्तो की मिठास सहेजने का पर्व है ‘संस्कृति पर्व’, ‘लोहड़ी’ ‘लोहड़ी’ को उतरी भारत अर्थात पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली आदि राज्यों में बड़े धूमधाम एंव उल्लास के साथ मनाया जाता है यह मूलतः किसानों का पर्व है ।‘लोहड़ी’ पंजाब में मनाया जाने वाला विशेष त्यौहार है और 13 जनवरी को मनाया जाता है


लोहड़ी हेतु अलाव जलाने के लिए छोटे-छोटे बच्चे घर-घर दिन में लकड़ी उपले मांगते हैं शाम को लकड़ियों की ढेरी लगाकर उस पर उपले रखे जाते हैं। अलाव जलाया जाता है सारे परिवार या समाज भर के लोग मिलकर चारों तरफ इकट्ठे होकर नाच – गाकर खुशी मनाते हैं। “Lohri Kyo Manai Jaati Hai”

Lohri Kyo Manai Jaati Hai"



लोहड़ी 2019 क्यों मनाई जाती और यह खुशियों का पर्व क्यों माना जाता है



जलती आग को तिल, मक्का,चावल, गेहूं, मूंगफली आदि की “तिलचोली” डालते हैं  धारणा है कि इससे वातावरण में कफ, ठंड का प्रकोप कम होता है। इस अवसर पर रंग बिरंगे नए कपड़े पहन एवं सज कर आग के चारो तरफ ढोल एंव नगाड़े की थाप पर भंगड़ा गिद्दा डालते, नाचते हुए गाते है।


इस पर्व पर पूरी तरह पंजाब की लोक संस्कृति झलकती है या मिट्टी की सौंधी खुशबू बाजे पंजाब के मेहनती बलशाली लोगों का मुख्य त्यौहार है संपूर्ण पंजाबी लोक संस्कृति स्वरूप  वाले इस त्योहार में जो भांगड़ा एवं गिद्दा नृत्य किया जाता है उसमें पंजाबियों का शौर्य बल दिखता है। “Lohri Kyo Manai Jaati Hai”

यह दोनों नृत्य अन्य सभी भारतीय नृत्यों से हटकर है पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार आने के कई दिन पहले युवा लड़के-लड़कियां द्वार द्वार पर जाकर गाना गा गा कर लकड़ियां तथा मेवा मांग कर इकट्ठा कर लोहड़ी की रात आग जलाकर नाचते गाते व फल मेवा खाते हैं।“Lohri Kyo Manai Jaati Hai”


पौष मास की ठंड और आसमान में रुई की भांति फैली धुंध में आग सेकने और उसके चारों और नाचने गाने का अपना ही आनंद होता है। इस दिन हर कोई एक-दूसरे का आदर्श मान करता है लोग एक दूसरे को रेवड़ी, मूंगफली, चिवड़े, गजक, भूग्गा, तिलचोली, मक्की के भूने दाने, गुड, फल आदि खाने के लिए देते हैं।

घरों में हर्षोल्लास के साथ गीत गाते हैं देर रात तक ढोलक के फड़कते ताल, गिद्दों भंगडो की धमक तथा गीतों की आवाज गूंजती रहती है पंजाब की कई जगहों पर परंपरागत वेशभूषा पहनकर महिलाएं व पुरूष नृत्य करते है।


पर्व की महिमा, महत्व और मान्यताएं:-


किसानों की खुशहाली से जुड़े लोहड़ी पर्व की बुनियाद मौसम बदलाव तथा फसलों के बढ़ने से जुड़ी हैं लोकोक्ति के अनुसार ‘लोही’ से बना लोहड़ी पर्व, जिसका अर्थ है ‘वर्षा होना, फसलों का फूटना’। ठंड के मौसम में किसान अपने खेत की जुताई-बुआई जैसे सारे फसली काम करके फसलों के बढ़ने और उनके पकने का इंतजार करते हैं।

इसी समय से सर्दी भी घटने लगती है इसलिए किसान लोहड़ी पर्व के माध्यम से इस सुखद, आंशाओं से भरी परिस्थितियों को सेलिब्रेट करते हैं।

दुल्ला भट्टी कौन था:-

पंजाब की लोक कथाओं में मुगल शासन काल के दौरान एक मुसलमान डाकू था दुल्ला भट्टी। उसका काम था राहगीरों को लूटना, और गरीबों की मदद करना। उसने एक निर्धन ब्राह्मण की दो बेटियों सुंदरी और मुंदरी को जालिमो से छुड़ाकर उनकी शादी की तथा उनकी झोली में शक्कर डाली।

एक डाकू होकर भी निर्धन लड़कियों के लिए पिता का फर्ज निभा कर वह सभ्यता की एक किवदंती बन गया और आज भी लोहड़ी के मौके पर उसको याद करते है ।“Lohri Kyo Manai Jaati Hai”


पोंगल:-


भारत के दक्षिणी क्षेत्र तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश,  और कर्नाटक में मकर – संक्रांति ‘पोंगल’ के रूप में मनाई जाती है इन प्रदेशों की स्थानीय भाषा में पोंगल शब्द का अर्थ है। ‘चावल से बनाया गया मीठा और स्वादिष्ट व्यंजन’। नई फसल का स्वागत करने के लिए एक मिट्टी के बर्तन में दूध उबाल आ जाता है और फिर उस में नए चावल, दाल घी डालकर खिचड़ी बनाई जाती है। इसे पूरे परिवार के लोग खाते हैं।



पोंगल का दूसरा दिन ‘मट्टू-पोंगल’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने पशुधन को स्वच्छ कर फूलों व घंटियों से सजाता है, उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है? और अच्छी फसल प्राप्त होने का धन्यवाद देता है तमिल पंचांग का नववर्ष पोंगल के पर्व से प्रारंभ होता है।“Lohri Kyo Manai Jaati Hai”


समय के बदलते रंग के साथ कई पुरानी रस्में और त्योहारों का आधुनिकीकरण हो गया है। लोहड़ी पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। शायद कुछ लोगों को तो लोहड़ी के इन पुराने गीतों लोहड़ी के इतिहास के पता भी नहीं होगा।

आजकल लोहड़ी के गीतों का स्थान ‘डीजे’ ने ले लिया है। भले कुछ भी हो, लेकिन लोहड़ी रिश्तो की मधुरता, सुकून, प्रेम और भाईचारिकता का प्रतीक है।“Lohri Kyo Manai Jaati Hai”

Lohri 2019:-

बर्ष 2019 में लोहड़ी का यह पर्व  13 जनवरी दिन रविवार को पुरे उत्साह के साथ मनाया जायेगा। ख़ास कर हरियाणा और पंजाब में Lohri तो देखने लायक होती है। लोग lohri से पहले ही लोगों को बधाई और शुभकामनाये देने लगते है 

Whatsapp और फेसबुक के जरिए और अन्य कई सोशल मीडिया दवारा लोगों तक अपनी शुभ कामनाये भेजने लगते है। Lohri का तैयार बहुत लोकप्रिय माना जाता है और इसे परिवार के साथ मिलकर मनाया जाता है। 

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Final Word:-

helpbookk.com की तरफ से आपको Lohri की हार्दिक शुभ कामनाये और यह Lohri का त्यौहार आपकी जिंदगी में चार चाँद लगा दे। हम ऐसी कामना करते है। 

दोस्तों आपको यह [ लोहड़ी 2019 क्यों मनाई जाती और यह खुशियों का पर्व क्यों माना जाता है ] पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ Share करें और अपने विचार Comment Box में दे। ताकि हम और अच्छी पोस्ट लिख सकें। Lohri Kyo Manai Jaati Hai



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